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चिंताजनक: बचत छोड़ कर्ज के जाल में फंस रहे भारतीय, पर्सनल लोन और हाई-रिस्क लोन में जबरदस्त उछाल

 Written By: Shivendra Singh
 Published : Apr 25, 2026 07:02 am IST,  Updated : Apr 25, 2026 07:02 am IST

देश में तेजी से बदलती वित्तीय आदतें अब चिंता का कारण बनती जा रही हैं। जहां पहले लोग बचत को प्राथमिकता देते थे, वहीं अब कर्ज लेना एक आम ट्रेंड बनता जा रहा है। RBI की ताजा रिपोर्ट में सामने आया है कि लोग तेजी से पर्सनल लोन और अन्य जोखिम भरे कर्ज की ओर बढ़ रहे हैं।

तेजी से बढ़ रहा कर्ज का...- India TV Hindi
तेजी से बढ़ रहा कर्ज का बोझ Image Source : CANVA

देश में तेजी से बदलती वित्तीय आदतें अब चिंता का कारण बनती जा रही हैं। जहां एक ओर लोग पहले बचत को प्रायोरिटी देते थे, वहीं अब बड़ी संख्या में लोग कर्ज पर निर्भर होते जा रहे हैं। हालिया आंकड़े बताते हैं कि पर्सनल लोन और हाई-रिस्क लोन में जबरदस्त बढ़ोतरी हो रही है, जिससे अर्थव्यवस्था को लेकर नए सवाल खड़े हो रहे हैं। रिपोर्ट के अनुसार, वित्तीय वर्ष 2025-26 में बैंक डिपॉजिट की वृद्धि दर 9 से 11 प्रतिशत के बीच रही, जबकि कर्ज की वृद्धि दर 13.8 प्रतिशत तक पहुंच गई। यानी कर्ज और जमा के बीच 3 से 5 प्रतिशत का अंतर बन गया है। यह संकेत देता है कि लोग बैंक में पैसा जमा करने के बजाय ज्यादा कर्ज ले रहे हैं।

पर्सनल लोन बना सबसे बड़ा ट्रेंड

हाल के महीनों में पर्सनल लोन की मांग सबसे ज्यादा बढ़ी है। इसमें कार लोन, गोल्ड लोन और अन्य उपभोक्ता ऋण शामिल हैं। आसान डिजिटल प्रक्रिया और तेजी से मिलने वाले लोन के कारण लोग ज्यादा उधारी लेने लगे हैं। चिंता की बात यह है कि हाई रिस्क वाले कर्जों में भी तेजी से बढ़ोतरी हो रही है। दिसंबर 2025 के बाद से इन लोन में सालाना आधार पर 17 प्रतिशत से अधिक की वृद्धि दर्ज की गई है। ऐसे कर्जों के डूबने का खतरा भी अधिक रहता है, जिससे बैंकिंग सिस्टम पर दबाव बढ़ सकता है।

अर्थव्यवस्था के लिए मिले-जुले संकेत

विशेषज्ञों के मुताबिक, कर्ज में बढ़ोतरी यह दिखाती है कि बाजार में मांग और खपत बढ़ रही है, जो अर्थव्यवस्था के लिए सकारात्मक संकेत हो सकता है। लेकिन अगर यह ट्रेंड ज्यादा समय तक जारी रहा, तो इससे वित्तीय असंतुलन पैदा हो सकता है। रिजर्व बैंक ने भी इस स्थिति पर चिंता जताई है। बैंक जमा को बढ़ाने के लिए ब्याज दरों में वृद्धि कर रहे हैं, लेकिन फिर भी अपेक्षित सुधार नहीं दिख रहा है। साथ ही, केंद्रीय बैंक बैंकों को सावधानी बरतने की सलाह दे रहा है ताकि भविष्य में किसी वित्तीय संकट से बचा जा सके।

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